भारत-पाकिस्तान के मध्य कष्मीर समस्या : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Keywords:
भौगोलिक परिदृश्य, कश्मीर विलय, महत्व, विवाद, घुसपैठ, भारत की प्रति क्रिया, संयुक्त राष्ट्र संघ का हस्तक्षेपAbstract
भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों में मतभेदों के बुनियादी और पारस्परिक कारक 1947 से लेकर वर्तमान समय तक किसी न
किसी रूप में दृष्टि गोचर होते रहते हैं, इस शोध पत्र में 1947 से लेकर वर्तमान तक भारत-पाकिस्तान के सम्बन्धों के
मध्य विवाद की प्रमुख समस्या ’’कश्मीर समस्या’’ का वस्तुनिष्ठ एवं तथ्यपरक वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। ब्रिटिश
इंडिया के विभाजन के फलस्वरूप विश्वमानचित्र पर एक नये राष्ट्र पाकिस्तान का जन्म हुआ। इस विभाजन के बाद कई
कारण है, जिसमें जनसंख्या, भू-प्रादेशिक, क्षेत्रीय और संसाधनीय है। शुरू से ही भारत एवं पाकिस्तान के बीच वैचारिक
टकराव हैं जिसके कारण दोनों देशों के बीच में भय और अविश्वास का वातावरण था यद्यपि भारत ने पाकिस्तान के
अस्तित्व को स्वीकार कर लिया लेकिन पाकिस्तान ने भारत की नीयत पर कभी विश्वास नहीं किया। जहाँ पाकिस्तान
इस्लाम धर्म पर आधारित है वहीं भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। दक्षिण में हिन्द महासागर, उत्तर में हिमालय पश्चिम में हिन्द
और पूर्व में बंगाल की नदियाँ और दल-दल भूमि के बीच भारतीय उपमहाद्वीप स्थित है अर्थात ईरान से बर्मा के मध्य
350 अक्षांश पर भारतीय उपमहाद्वीप स्थित है। एक हिस्सा विषवत् रेखा के 80 तक और दक्षिण की ओर श्रीलंका है।
इसके तीन ओर सागर है। इस उपमहाद्वीप में 19 लाख वर्ग मील में छः राज्यों का समूह है। यह राज्य हैं अफगानिस्तान,
पाकिस्तान, भारत, नेपाल, बंग्लादेश, श्रीलंका और भूटान। इन राज्यों में विश्व की 1/5 भाग जनसंख्या निवास करती है।
भारत का विभाजन ब्रिटिश इंडिया के मुस्लिम और गैर मुस्लिम क्षेत्रों का हुआ और 1947 में विश्व मानचित्र पर पाकिस्तान
का उद्भव हुआ। पाकिस्तान का उर्दू में अर्थ होता है जो पाक या पवित्र हो। पाकिस्तान पर प्रकाशित पुस्तक में रहमत
अली ने लिखा है कि यहाँ पर मुस्लिम लोगों की स्थिति बहुत दयनीय थी जिसके विकास की आवश्यकता का रेखांकन
लाला लाजपत राय ने किया था। चौधरी रहमत अली ने पाकिस्तान शब्द की रचना की थी च् से पंजाब । से
अफगानिस्तान ज्ञ से कश्मीर ै से सिंध और अन्त के तीन अक्षर बलूचिस्तान से लेकर पाकिस्तान बनाया।
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