RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES 2023-10-02T05:07:23+00:00 Dr. Ritesh Kumar Gupta Open Journal Systems <h4>International Refereed, Blind Peer Reviewed, Open Access, Multidisciplinary Research Journals</h4> <p>Periodicity: Quaterly</p> <p>Language: English &amp; Hindi</p> <p>ISSN : 2348-3318 (Print)</p> ग्रामीण किशोरों के दुश्चिंता पर सूर्य नमस्कार के प्रभाव का अध्ययन 2023-10-02T04:28:34+00:00 सूर्य प्रकाश रतूड़ी मोनिका रानी <p>किशोरावस्था में लड़के-लड़कियों के मन और शरीर में निरन्तर परिवर्तन होते हैं। चिन्तन एक मानसिक प्रक्रिया है। कुछ विद्वान चिन्तन को वातावरण से मिलने वाली सूचनाओं का मानसिक जोड़-तोड़ बताते है। चिन्तन एक अव्यक्त मानसिक प्रक्रिया है जिसमें चिन्तनषील व्यक्ति अपने से जुड़े हुए प्रतीकों, सम्प्रत्ययों, नियमों एवं अन्य मध्यस्थ इकाइयों के मानसिक जोड़-तोड़ में लगा रहता है। मनुष्य के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण अवस्था किशोरावस्था होती है। यह अवस्था लगभग 13 से 19 वर्ष तक होती है। एक बालक जो भी अनुभव इस आयु वर्ग में ग्रहण करता है, वे उसके भावी जीवन के निर्माण में सहायक हैं। यह अवस्था बाल्यकाल से परिपक्वता तक का अस्थिर व अद्भुत मार्ग है। यह अवस्था स्वप्न, आगाध प्रेम तथा दिलों को हिला देने वाली अवस्था है। इस आयु वर्ग को जीवन का बसन्त काल भी कहा जाता है।यह शोध ऋषिकेष नगर से लगे हुए ग्रामों के किषोरें पर किया गया है। इसमें 50 किषारियॉ एवं 50 किषारों को सम्मिलित किया गया है। यह शोध 40 दिनों का रहा है। शोध के परिणाम सकारात्मक है। सूर्य नमस्कार के अभ्यास से शरीर बलिष्ठ व ओजस्वी, चेतना प्रखर, नर्वस प्रणाली बेहतर, शरीर के जोड़ मजबूत, मांसपेषियॉ सुगठित, पाचन क्षमता दुरस्त, हार्मोंन संतुलित होने के साथ-साथ मानसिक सबलता, प्रफुल्लता, उत्साह व कुछ करने उमंग जाग्रत होती है।</p> 2023-09-30T00:00:00+00:00 Copyright (c) 2023 Sustainability and Innovations Techniques in India with Special Reference to the Agriculture and Rural Development 2023-10-02T04:35:30+00:00 Bimla Pandey Santosh Kumar Sharma2 <p>Ability to continue existing over time is what we mean when we talk about sustainability. The term "innovation"<br>refers to the act, process, or activity of innovating or the term "innovation" refers to anything novel, be it a process,<br>an idea, a product, etc. This research paper illustrates how creative techniques in agricultural and rural<br>development of our country lead to sustainable development for our country as a whole. In addition to this, the<br>study focuses on the numerous advances that have been accomplished in the areas of agriculture and rural<br>development. The researcher has come to the conclusion that there is a significant demand for sustainable<br>agriculture and the development of rural areas through the implementation of appropriate innovations.</p> 2023-09-30T00:00:00+00:00 Copyright (c) 2023 Small Livestock Production : A Potential Agri-Business in Rural India 2023-10-02T04:39:54+00:00 Harvir Singh Chaudhary Mamta Chaudhary <p>The commercial goat and sheep farming is coming up fast in India. India has 148.9 million goat, 109.9 million<br>buffaloes and 74.3 million sheep population. It plays an important role on the development of rural socio-economy<br>particularly in dry land and denuded hilly tracts. There are great opportunities for rural employment of resourceless<br>poor population. The meat production, which jibes well with dairying, is placed at No. 8 position in the world.<br>India produces about 4.9 million tonnes of meat annually valued as $4,600 million, and has grown @ 4.5% during<br>the last two decades. However, during the last five years, this segment has been growing very fast at the rate of<br>27% annually and has a good future given the present attention by the government and private entrepreneurs. The<br>need of the day is to increase carcass weight and reproductive efficiency with a strategy to produce more quality<br>meat/animal though scientific approach. Therefore, it is necessary to support the small ruminant production sector<br>in the country to meet tha gap of quality protein supply in the country and to enhance the export potential of<br>organic meat of Indian origin.</p> 2023-09-30T00:00:00+00:00 Copyright (c) 2023 AI's Influence on Customer Decision-Making: A Comprehensive Examination 2023-10-02T04:45:42+00:00 P. K. Agarwal Sourabh Poswal <p>The study examines the significant influence of artificial intelligence (AI) on consumer decision-making<br>in various industries. Based on an extensive literature analysis, this study examines the significant<br>impact of artificial intelligence (AI) on consumer decision-making processes. Specifically, it explores<br>how AI facilitates personalisation, predictive analytics, and automation, influencing consumer choices.<br>However, it also highlights the ethical aspects and potential discriminatory hazards linked to AI-driven<br>decisions. Algorithmic bias, privacy concerns, transparency, and fairness are significant considerations<br>in this context. The research highlights the importance of implementing responsible AI governance,<br>focusing on developing strategies to mitigate potential risks and conducting continuous research to<br>effectively utilise the potential of AI while protecting consumer rights and promoting fairness. This<br>research study contributes to a more comprehensive comprehension of the impact of artificial<br>intelligence on contemporary consumer decision-making processes, providing valuable insights for<br>businesses and policymakers.</p> 2023-09-30T00:00:00+00:00 Copyright (c) 2023 Coalition Politics and Indian Democracy: Challenges and Prospects 2023-10-02T04:51:58+00:00 Alpa Singh <p>Coalition politics has become an integral feature of Indian democracy, playing a significant role in<br>shaping the country's political landscape. This research paper aims to provide a comprehensive<br>analysis of coalition politics in India and its impact on the functioning of democracy. It also highlights<br>the factors that contribute to the formation of coalitions, such as the fragmented nature of Indian<br>politics, regional diversity, and the need for consensus-building in a multi-party system. Additionally,<br>the paper examines the ideological and opportunistic motivations that drive political parties to form<br>coalitions. It explores how power is distributed among various coalition partners, the role of regional<br>and national parties, and the challenges in maintaining stability and coherence within diverse<br>coalitions. This paper also investigates the impact of coalition politics on policy-making processes and<br>governance effectiveness. It emphasizes the need for strategic alliances, consensus-building<br>mechanisms, and effective governance structures to address the inherent complexities and ensure<br>stable coalition governments. It offers insights into the future prospects and challenges of coalition<br>politics in Indian democracy and provide valuable insights for policymakers, political analysts, and<br>scholars interested in comparative politics and democratic governance.</p> 2023-09-30T00:00:00+00:00 Copyright (c) 2023 वेदों में सिविल इंजीनियरिंग 2023-10-02T04:56:04+00:00 गिरिन्द्र मोहन ठाकुर शोयब कुरेशी नारायण पालीवाल <p>सिविल इंजिनियरिंग में भौतिक और प्राकृतिक रूप से बने परिवेष में पुल, सड़क, नहरें, बाँध, भवनों आदि के डिजाइन<br>निर्माण और रख-रखाव से जुड़ी समस्याओं पर कार्य किया जाता है। वैदिक संस्कृति एक ग्रामीण संस्कृति थी, इससे<br>संबंधित पुरातात्विक प्रमाणों की अनुपलब्धता हमें एक मात्र साहित्यिक स्त्रोतों के माध्यम से समझने की इजाजत देता है।<br>सिन्धु सभ्यता के अवशान के बाद हमें पुख्ता वास्तु व भौतिक सामग्री के नाम पर मुख्यतया छिट-फुट मृद्भाण्ड ही प्राप्त<br>होते हैं, वहीं साहित्यिक स्त्रोत एक वृहत्र वैज्ञानिक परिवेष का चित्र प्रस्तुत करती है। इन्हीं साहित्यिक स्त्रोतों में सन्दर्भित<br>जानकारी के आधार पर प्रस्तुत लेख में वैदिक युगीन सिविल इंजिनियरिंग को समझने का प्रयास किया गया है। चूँकि<br>ग्रामीण संस्कृति में जनसंख्या विरल होती है इसलिए शहरी समाज वाली सुव्यवस्था की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। शहरी<br>सुव्यवस्था सामुहिक आवश्यकता का परिणाम है। वेदों में आरामदायक, सुरक्षित तथा सुंदरता युक्त भवन बनाने योजना का<br>विवरण प्राप्त होता है।</p> 2023-09-30T00:00:00+00:00 Copyright (c) 2023 आधुनिक समय में शिल्पग्रन्थों की खोज, अनुवाद, प्रकाशन तथा अध्ययन सम्बन्धी विवरण 2023-10-02T05:02:05+00:00 मधु बहुगुणा <p>प्राचीन भारतीय शिल्पग्रन्थों के सम्बन्ध में आज तक जितना ज्ञान प्राप्त को सका है तथा इस दिशा में जो प्रयास अभी जारी है यह सब बीसवीं सदी की उपलब्धि है] बीसवीं सदी के पहले तक समस्त शिल्पशास्त्र विस्मृति के अंधकारपूर्ण गर्भ में खोए हुए थेA भारतीय बुद्धिजीवियों राष्ट्रीयवादी इतिहासकारों तथा विचारकों के निकट कला के सैधांतिक सैद्धांतिक पक्ष तथा कला व्याकरण पर प्राचीन काल में कोई विचार नहीं किये गये जैसे पूर्व धारणाओं को खंडित करने में सक्षम रही तथा इस विषय पर व्यापक चिंतन] शोधकार्य तथा निबंध लेखन जैसे कार्यों के लिए मार्गदर्शक साबित हुईA अग्रिम कड़ियों में अभिलाषीतार्थ चिंतामणि तथा मानोसल्लास] शिल्परत्न] नादर शिल्पशास्त्र] काश्यपशिल्प जैसे महत्वपूर्ण शिल्पग्रंथ हैं जिनका समय-समय पर अनुवाद प्रकाशन एवं होता रहा</p> 2023-09-30T00:00:00+00:00 Copyright (c) 2023 सामाजिक कुरुतियों की रोकथाम में योग की प्रासंगिकता 2023-10-02T05:07:23+00:00 सेतवान उधम सिंह <p>भारतवर्ष विभिन्नताओं का देश है यहां अनेक धर्मों, जातियों, संप्रदायों के लोग निवास करते हैं, जिनका रहन-सहन भाषा- बोली पहनावा मान्यताएं परस्पर भिन्न है यहां कदम-कदम पर भाषा बदल जाती है, परंतु यह भारत की पहचान है कि अनेकता में एकता दिखाई देती है वहीं दूसरी ओर यह विभिन्न सामाजिक कुरुतियों को जन्म देती है, यह सामाजिक कुरुतियाँ कहीं क्षेत्रवाद के कारण कहीं जातिवाद के कारण तो कहीं भाषावाद के कारण या फिर विभिन्न सम्प्रदाय के कारण समाज में दिखायी देती हैं। भारत में अनेक धर्म एवं सम्प्रदाय फलते-फूलते रहें हैं। उनके अलग- अलग रीति रिवाज होते हैं। यह सभी लोग अपनी अपनी श्रेष्ठता को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न प्रकार के आयोजन करते रहते हैं ऐसी परिस्थितियों में जब एक दूसरे के अहम को ठेस पहुंचती है तो विरोध की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे आपस में एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने की दृष्टि से लड़ाई दंगे चोरी मारपीट आदि सामाजिक अव्यवस्थाओं का उदय होता है, जिसके कारण समाज में अनेक सामाजिक कुरुतियाँ उत्पन्न होती हैं। देश में अंधविष्वास जातिवाद, सम्प्रदायवाद, क्षेत्रवाद, दहेज प्रथा आदि पैर पसारे हुए हैं इनके दुष्परिणाम समाज में स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं जिनके कारण बेरोजगारी, अशिक्षा, भुखमरी, ऊंच-नीच छुआ-छूत आदि घटनाएं समाज में देखने को मिलती हैं। योग के ज्ञान (यम, नियम) एवं अभ्यास द्वारा उपरोक्त कुरूतियों का निवारण कैसे हो सकता है इस शोध पत्र में यह दर्शाने का प्रयास किया गया है।</p> 2023-09-30T00:00:00+00:00 Copyright (c) 2023