टैगोर का चिन्तनः वर्तमान सत्ताओं का मार्गदर्शन
Keywords:
टैगोर का चिंतन, मार्गदर्शन, वर्तमान सत्ताAbstract
टैगोर भारत के सांस्कृतिक पुनरूत्थान के अग्रदूत थे वे आधुनिक भारत के नवजागरण से उपजे विश्व कवि थे जिन्होंने
तमाम संकीर्णताओं की सीमाओं को लाँघ कर उदारता और प्रेम से मानवता के सार्वभौमिक मूल्य की आकांक्षा को
अभिव्यक्त किया। आध्यात्मिकता के साथ राजनीति का मार्गदर्शन किया। भारतीय जनमानस में भाग्यवादिता की
हीनभावना के विरूद्ध आत्म निर्भरता और अन्योन्याश्रित समझ के सतत विकास का मार्ग प्रशस्त किया। सामाजिक
पुनर्निर्माण में वे शोषण, भेद और स्वार्थी प्रकृतियों का नाश चहाते थे। राज्य की सर्वशक्तिमान स्थिति के विरूद्ध वे
व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, सम्पत्ति और प्राकृतिक अधिकारों के हामी थे। सत्ता का केन्द्रीयकरण, अधिनायकवाद अथवा
सर्वाधिकारवाद के विपरीत, भ्रतृत्व एवं सहयोग, प्रेम व शान्ति प्रकृति पर उनका अन्तर्राष्ट्रीय मानवतावादी दृष्टिकोण,
वर्तमान युग में प्रासंगिक हो रहा है। उनके सामाजिक एवं राजनीतिक विचारों में विश्व सरकार के नागरिक होने के
विचार समाहित है।
References
डा0 जोशी एम0सी0, गाँधी, नेहरू टैगोर तथा अम्बेडकर, अभिव्यक्ति प्रकाशन इलाहाबाद-2000
डा0 सेन एस0, दि पॉलिटिकल थौट ऑफ टैगोर-1929
टैगोर, नेश्नलईजम - 1917
वहीं
डा0 सत्येन्द्र, बगला साहित्य का संक्षिप्त इतिहास।
सिद्धान्त अग्निहोत्री, रविन्द्रनाथ टैगोर के विचार आई0क्यूस्टडी यूट्यूब चैनल पार्ट-2018
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