महात्मा गांधी एवं रचनात्मक कार्यक्रम

Authors

  • संतोष कुमार सिंह असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, राजकीय कन्या महाविद्यालय, दल्लावाला, खानपुर, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)

Keywords:

गांधी जी रचनात्मक कार्यक्रम, अस्पृश्यता, खादी, सांप्रदायिक एकता, आधारभूत शिक्षा, ग्रामोद्योग, वयस्क शिक्षा, महिला, स्वास्थ्य, स्वच्छता, राष्ट्रीय भाषा, आर्थिक समानता, कृषक, श्रम, आदिवासी, कुष्ठ उन्मूलन, छात्र

Abstract

गांधी जी भारत के लिए आदर्श समाज का स्वप्न देखा था इसलिए उन्होंने रचनात्मक कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की थी। यही वह कार्यक्रम था जो व्यक्ति के भीतर सामाजिक परिवर्तन की अवधारणा को पुष्ट करता है। गांधी जी द्वारा वर्णित रचनात्मक कार्यक्रम ने मानव जीवन के विभिन्न पक्षों को स्पर्श करने का प्रयास किया है। गांधी जी की मान्यता थी कि समाज में परिवर्तन हिंसक जन आंदोलन के माध्यम से कभी भी नहीं आ सकता और न ही इसके जरिए टिकाऊ समाज विकसित हो सकता है। रचनात्मक कार्यक्रम समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का बेहतर प्रयास है। इस कार्यक्रम के द्वारा व्यक्ति अपने अधिकार एवं कर्तव्य को समझने का प्रयास करेगा और एक सशक्त भारत को निर्मित करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा। गांधी जी का यह दृढ़ विश्वास था कि यदि रचनात्मक कार्यक्रम पर ध्यान आकृष्ट किया जाए तो इसका अर्थ होगा पूर्ण स्वराज की प्राप्ति। रचनात्मक कार्यक्रम केवल औपनिवेशिक शासन के विरूद्ध एक अहिंसक संघर्ष का एक सामरिक साधन ही नहीं था बल्कि व्यक्ति को स्वावलम्बी और आत्मनिर्भर बनाने का अभियान था।

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Published

15-04-2022

How to Cite

संतोष कुमार सिंह. (2022). महात्मा गांधी एवं रचनात्मक कार्यक्रम. RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES, 9(1), 31–34. Retrieved from https://ijorr.in/ojs/index.php/rrssh/article/view/6