महात्मा गांधी का आर्थिक चिंतन
Keywords:
महात्मा गांधी, आर्थिक चिंतनAbstract
गांधी जी मूलतः अर्थशास्त्री नहीं थे और नहीं वे एक ऐसे नेता थे जिनका एकमात्र उद्देश्य भारत की आर्थिक महाशक्ति
बनाना था बल्कि वे एक ऐसे विचारक थे, जो भारत को परतंत्रता की जंजीरों से मुक्त करना चाहते थे। अपने इस प्रयास
के दौरान उन्होंने इस बात पर गहराई से विचार किया कि भारत में ब्रिटिश राज का सर्वाधिक दुष्परिणाम आर्थिक क्षेत्र
में रहा है। जो भारत कभी संसाधनों से परिपूर्ण था, वही भारत आज श्रमहीन हो गया है। धन के तीव्र गति से होने वाले
निष्कासन ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। अतः उन्होंने राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आर्थिक
लक्ष्यों को आधार बनाया। गांधी जी ने अर्थिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए स्वदेशी, सर्वोदय, ट्रस्टीशिप, शारीरिक श्रम,
अपरिग्रह, औधोगीकरण आदि आवश्यक पहलुओं पर विशेष बल दिया। गांधी जी ने अपने आर्थिक विचारों और सिद्धान्तों
को एक आदर्श, अहिंसक शोषणामुक्त, मानवतावादी तथा समतावादी समाज के सांचे में ढालने को प्रयास किया है।
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