महात्मा गांधी का आर्थिक चिंतन

Authors

  • संतोष कुमार सिंह असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, राजकीय कन्या महाविद्यालय दल्लावाला, खानपुर, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)

Keywords:

महात्मा गांधी, आर्थिक चिंतन

Abstract

गांधी जी मूलतः अर्थशास्त्री नहीं थे और नहीं वे एक ऐसे नेता थे जिनका एकमात्र उद्देश्य भारत की आर्थिक महाशक्ति
बनाना था बल्कि वे एक ऐसे विचारक थे, जो भारत को परतंत्रता की जंजीरों से मुक्त करना चाहते थे। अपने इस प्रयास
के दौरान उन्होंने इस बात पर गहराई से विचार किया कि भारत में ब्रिटिश राज का सर्वाधिक दुष्परिणाम आर्थिक क्षेत्र
में रहा है। जो भारत कभी संसाधनों से परिपूर्ण था, वही भारत आज श्रमहीन हो गया है। धन के तीव्र गति से होने वाले
निष्कासन ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। अतः उन्होंने राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आर्थिक
लक्ष्यों को आधार बनाया। गांधी जी ने अर्थिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए स्वदेशी, सर्वोदय, ट्रस्टीशिप, शारीरिक श्रम,
अपरिग्रह, औधोगीकरण आदि आवश्यक पहलुओं पर विशेष बल दिया। गांधी जी ने अपने आर्थिक विचारों और सिद्धान्तों
को एक आदर्श, अहिंसक शोषणामुक्त, मानवतावादी तथा समतावादी समाज के सांचे में ढालने को प्रयास किया है।

Author Biography

संतोष कुमार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, राजकीय कन्या महाविद्यालय दल्लावाला, खानपुर, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)

खानपुर, हरिद्वार (उत्तराखण्ड) India

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Published

28-09-2021

How to Cite

संतोष कुमार सिंह. (2021). महात्मा गांधी का आर्थिक चिंतन. RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES, 8(3), 35–38. Retrieved from https://ijorr.in/ojs/index.php/rrssh/article/view/86