वैदिक सरस्वती के विकास की निरंतरता : पुराणों के विषेष संदर्भ में (एक अध्ययन)

Authors

  • अनिल कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर, इतिहास विभाग, राजकीय महाविद्यालय मरगूबपुर, रुड़की (हरिद्वार), उत्तराखंड

Keywords:

वैदिक सरस्वती, विकास की निरंतरता, पुराण

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र में वैदिक काल से पुराणों तक सरस्वती के विकास की निरंतरता को बताने का प्रयास किया गया हैं।
सर्वप्रथम ऋग्वेद में सरस्वती को नदी रुप में मान्यता मिलती है। इसके बाद उत्तरवैदिक काल में सरस्वती को नदी एवं
देवी के रुप में मान्यता मिलती है। महाकाव्यों में भी यही स्थिति है। विशेषतः पुराणों तक आते-आते सरस्वती का वाणी
और विद्या के अलावा बुद्धि और सर्वकलाओं की देवी रुप में निरंतर विकास होता गया।

Author Biography

अनिल कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, इतिहास विभाग, राजकीय महाविद्यालय मरगूबपुर, रुड़की (हरिद्वार), उत्तराखंड

रुड़की (हरिद्वार), उत्तराखंड India

References

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Published

28-09-2021

How to Cite

अनिल कुमार. (2021). वैदिक सरस्वती के विकास की निरंतरता : पुराणों के विषेष संदर्भ में (एक अध्ययन). RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES, 8(3), 31–34. Retrieved from https://ijorr.in/ojs/index.php/rrssh/article/view/85