वैदिक सरस्वती के विकास की निरंतरता : पुराणों के विषेष संदर्भ में (एक अध्ययन)
Keywords:
वैदिक सरस्वती, विकास की निरंतरता, पुराणAbstract
प्रस्तुत शोध पत्र में वैदिक काल से पुराणों तक सरस्वती के विकास की निरंतरता को बताने का प्रयास किया गया हैं।
सर्वप्रथम ऋग्वेद में सरस्वती को नदी रुप में मान्यता मिलती है। इसके बाद उत्तरवैदिक काल में सरस्वती को नदी एवं
देवी के रुप में मान्यता मिलती है। महाकाव्यों में भी यही स्थिति है। विशेषतः पुराणों तक आते-आते सरस्वती का वाणी
और विद्या के अलावा बुद्धि और सर्वकलाओं की देवी रुप में निरंतर विकास होता गया।
References
१. ऋग्वेद, १.३.१०-१३
२. हिन्दुस्तान, दैनिक समाचार पत्र, सुबह-ए-बनारस, १९.व्म्१.२व्म्व्म्७. पृष्ठ संख्या १.
३. ऋग्वेद, १.३.१०४. अथर्ववेद, ३.२व्म्.७.
५. गोपथ ब्राह्मण, २.१.२९.६. शतपथ ब्राह्मण, ११.४.३.७; ११.४.३.१६.
७. सरस्वती, रहस्योंपनिषद्, ५.११.
८. पाराशर गृह्यसूत्र, २.४.८.
९. बाल्मिकी रामायण, २.७१.५.
१०. बाल्मिकी रामायण, ६.१२व्म्.२४.
११. महाभारत, २.९, कालिंदी विदिशा वेष्वा नर्मदा वेद वाहिनी। विपाशा च शतदु/ाद्रभागा सरस्वती ।।
१२. महाभारत, ७.
१३.३१. १३. महाभारत, ३२२१ - २२२.
१४. वाग्देवतयाःस्तवनं ब्रह्मवैवŸार्पुराण, २.५.१.
१५. ज्ञानाधिदेवी, वहीं, २.५.११
१६. त्यमेव कामदा देवि मेघेषु सृजमे पयः, वामन पुराण, ४०-४१
१७. वृकि् स्कन्दपुराण, ६.४६.४८
१८. सर्वास्त्वापस्तमवेवेति। वामनपुराण, ४०-४१
१९. पुराण, ५.२७.११.
२०. देवीभागवतपुराण, ९.८२.३.
२१. ब्रह्मवैवŸार्पुराण, २.७.२-३.
२२. वहीं, २.१.१., २.४.४.
२३. वहीं, २.२.५४-५५.
२४. वहीं, १.९.६७.
२५. वायुपुराण, १.२३.३४. ब्राह्मणः पुत्रकामनस्य ध्यामतः परमेष्ठितः प्रादुर्भूता महानाद विम्रुपा सरस्वती।
२६. मत्स्यपुराण, ३.३०.
२७. प्राधानिक रहस्य, मार्कण्डेयपुराण, ३.४.७. सर्वस्याधा महालक्ष्मी स्त्रिगुण परमेम्री। शून्य तदखिलं लोकं विलोक्य परमेम्री।
बभार परमं रुपं तमसा केवलेन हि ।।
२८. मत्स्य पुराण, ३.३१-३२.
२९. मार्कण्डेयपुराण, प्राधानिक रहस्य, श्लोक १६.
३0 स्कन्दपुराण, ७.३३.८७., नमस्ते शारदे देवी काश्मीरपुरवासिनी।
३१. रहस्योपनिषद्, ३.१८.
३२. ब्रह्मपुराण, १०२.२.३. सावित्री चैव गायत्री श्रद्धा मेधा सरस्वती। एता मम सुता ज्येक धर्मसंस्थानहेतवः।।
३३. स्कन्दपुराण, ४.४६.
३४. पुराण, ५.२७.११६-११७.
३५. स्कन्दपुराण. ६.४६.२२.३६. वायुपुराण, १.२३.३४.
३७. ब्रह्माण्ड पुराण, ४.१९.६९. लक्ष्मीः सरस्वती गौरी चण्डिका त्रिपुराम्बिका। चैखो भैरवी काली महाशास्त्री च भातरः।।
३८. ब्रह्माण्ड पुराण, ४.१९.६९.अथचक्र श्येन्द्रस्य चतुर्थ पूर्वसंभ्रिताः।
३९. वैकृतिक रहस्य, १४.
४0. मार्कण्डेय पुराण, ८५.१४.
४१. देवीभागवत पुराण, ५.१९.५४.
४२. ब्रह्मवैवŸार्पुराण, २.१.१२१.
४३. वहीं, १२.४.२३-२४.
४४. स्कन्द पुराण, ६.४६.३७ व ३९.
४५. ब्रह्मवैवŸार्पुराण, २.४.३९.
४६. वहीं, २.४.४६-४८.
४७. वहीं, २.४.५३.
४८. स्कन्द पुराण, सूत संहिता जटाजूट धरा शुद्धा चन्द्रार्थ कृतशेखरा। पुण्डरीकसमासीना नीतग्रीवा त्रिलोचना।।
४९. मार्कण्डेय पुराण, प्रा.र. १५.
मोइनर, विलियम्स, एम.; ए संस्कृत डिक्शनरी, आक्सफोर्ड, १९५६. पृष्ठ संख्या-१व्म्११.
५१. विष्णुधर्मोŸारपुराण, ३.६४.१-३.
५२. वहीं, ३.७३.२५.
Additional Files
Published
How to Cite
Issue
Section
License

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License.