स्थानीय स्तर की राजनीतिक व्यवस्था में सकारात्मक कार्यवाही की भूमिका का मूल्यांकन
Keywords:
स्थानीय राजकीय व्यवस्था, सकारात्मक कार्यवाही एवं भूमिका मूल्याकंनAbstract
लोकतंत्र राजनीति विज्ञान के अवयवों में वह सबसे प्राचीन शब्द है। जिसने सर्वप्रथम मानवीय समाज में सर्व सहमति एवं स्वराज को मान्यता दी। जिसे क्रमबद्ध तरीके से प्राचीन भारतीय वैदिक संस्कृति, महाकाव्य कालखंड एवं बुद्ध संस्कृति से लेकर उपनिवेश कालीन साम्राज्य की सभ्यता तक कभी सकारात्मक तो कभी नकारात्मक रूप से समाज के बीच वरीयता बनाई गई। हालांकि लोकतंत्र की परिभाषा को सामंतवादी, साम्राज्यवादी, पूंजीवादी, माक्र्सवादी दृष्टिकोणओं के आधार पर समय-समय पर परिवर्तन किया गया किंतु 1950 के दशक में पूरी दुनिया के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक बदले हुए आयामों में संवैधानिक आयाम को वरीयता देते हुए जन सामान्य को स्वराज्य की शक्ति का स्रोत माना गया। इसी आधार को भारत के राजनीतिक व्यवस्था का अंग बनाया गया। जिसमें जनता को सर्वाेपरि मानते हुए उसके अधिकार, न्याय, स्वतंत्रता समानता को सुनिश्चित करने के लिए लिखित संविधान की परिपाटी तैयार की गई। इसी क्रम में भारत में गांधीवादी दृष्टिकोणओं के आधार पर लघु व कुटीर उद्योग की संरचना के साथ लोकतंत्र के विकेंद्रीकरण की परिभाषा सुनिश्चित हुई, जिसके संदर्भ में यह कहा गया कि स्थानीय स्तर पर राजनीतिक भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए पंचायती राज व्यवस्था को क्रियान्वित किया जाए। जिस के संदर्भ में सामुदायिक विकास कार्यक्रम एवं पंचायती राज व्यवस्था को 1950 के दशक से ही वैधानिक रूप से वरीयता दी गई एवम 1990 के दशक में भारत में पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक व्यवस्था देकर देश के नागरिकों को पूर्ण रूप से शासन में भागीदारी दी गई। अर्थात भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में समस्त जन सामान्य की लोकतांत्रिक भागीदारी को रेखांकित किया गया।
References
दुबे, एस0सी0 (1964), एक भारतीय ग्रामीण, नैशनल पब्लिशिंग हाउस दिल्ली
सिंह, महीप, सामाजिक परिवर्तन का मार्ग, दैनिक जागरण, 11 मई, 2006
थैक्कामलाई, एस0एस0, रूरल डवलपमेंट एण्ड सोशल चेंज इन इण्डिया, 1983
ठाकुर देवेन्द्र नाथ, रूरल डवलपमेंट एण्ड पोलिटिकल लीडरशिप इन इण्डिया, नई दिल्ली, 1986
सारस्वत, ऋतु, राजनीति में महिला नेतृत्व सम्भावना की तलाश, योजना, जनवरी, 2009
सिंह, गोपाल व सिंह, राजेन्द्र गौड, आरक्षण नीति पर पुर्न विचार की जरूरत, अमर उजाला, 20 अगस्त, 1994
राघव, अरूण कुमार, प्रतियोगिता दर्पण, मार्च 2012
बैकवर्ड क्लास कमीशन की रिपोर्ट, 1981
एण्टी मण्डल कमीशन फोरम (1990), टूवर्डस कास्टलेस इण्डिया लोकायन बुलेटिन, जुलाई, अक्टूबर
Downloads
Published
How to Cite
Issue
Section
License

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License.