आधुनिक जीवन शैली विकार मोटापा रोग प्रबन्धन में योग की भूमिका
Keywords:
आधुनिक जीवन शैली, योग, मोटापाAbstract
वसा ऊतकों के अत्यधिक संचय के कारण एक वांछनीय मानक से 20 प्रतिषत शरीर का वजन अधिक हो जाता है।
अमेरिका में लगभग एक तिहाई वयस्क लोग मोटे हैं। यहां तक कि मध्यम मोटापा स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। यह हृदय
रोग, उच्च रक्तचाप, फुफ्फुसीय रोग, गैर-इंसुलिन पर निर्भर मधुमेह, गठिया, कुछ कैंसर, वैरिकाज नसों और पित्ताशय की
बीमारी के लिए एक जोखिम भरा है। आहार में अधिकांश अधिशेष कैलोरी ट्राइग्लिसराइड्स में परिवर्तित हो जाते हैं और
वसा कोशिकाओं में जमा हो जाता हैं। प्रारंभ में एडिपोसाइट्स आकार में वृद्धि करते हैं, लेकिन अधिकतम आकार में, वह
विभाजित होते हैं। नतीजतन, एडिपोसाइट्स का प्रसार अत्यधिक मोटापे में होता है। एंजाइम एंडोथेलियल लिपोप्रोटीन
लाइपेज ट्राइग्लिसराइड्स भंडारण को नियंत्रित करता है। हिप वसा में एंजाइम बहुत सक्रिय है। पेट में वसा का संचय
उच्च रक्त कोलेस्ट्रॉल स्तर और अन्य हृदय जोखिम कारकों के साथ जुड़ा हुआ है क्योंकि इस क्षेत्र में वसा कोशिकाएं
अधिक चयापचय सक्रिय रूप से दिखाई देती हैं। अतः नियमित योग अभ्यास को शामिल करने से एक शक्तिशाली वृद्धि हो
सकती है। जिससे ताकत, लचीलापन, गति की सीमा, एकाग्रता, हृदय स्वास्थ्य विकसित करने में मदद मिलती है साथ ही
तनाव और जकड़न भी कम होती है।
https://doi.org/10.5281/zenodo.7362724
References
शंकर, गणेश, (1998), योग का समग्र दृष्टिकोण, पाठक वार्ड बीना, माधव धमेचा पब्लिशर्स जागेश्वरी माता परिसर के लिए, म.प्र. 470113
शर्मा, रामावतार और शुक्ला, एम., (1998), योग और समग्र स्वास्थ्य योग में स्वास्थ्य, पाठक वार्ड बीना, शंकर गणेश, माधव धमेचा, पब्लिशर्स जागेश्वरी माता परिसर के लिए, म.प्र., 470113
सरस्वती, स्वामी चरणानंद, (2005), स्वतंत्रता पर चार अध्याय, मुंगेर, बिहार, भारत, योग प्रकाशन ट्रस्ट
सरस्वती, स्वामी निरंजनानंद, (1999), घेरंड संहिता, मुंगेर, बिहार योग भारती
रॉबिंस और कोट्रान, (2006), रोग का मूल रोग, 7 वां संस्करण, नई दिल्ली, सुंदर एल्सेवियर एलडीटी, लाजपत नगर-110024, भारत
तीर्थ स्वामी ओमानंद, पातंजल योग प्रदीप, नौवॉं संस्करण, संवत्-2047, गीता प्रेस गोरखपुर
श्रीमद्भगवद्गीता, 14वॉं संस्करण सं. 1963, गीताप्रेस गोरखपुर
कृष्णा पी.वी. राव, (1998), योग के समग्र दृष्टिकोण में मनोचिकित्सा की प्रणाली के रूप में योग, पाठक वार्ड बीना, शंकर गणेश एवं माधव धमेचा, पब्लिशर्स जागेश्वरी माता परिसर के लिए, म.प्र., 470113
रामसुखदास, स्वामी, विक्रम संवत् 2064, साधक संजीवनी, गीताप्रेस, गोरखपुर
काला, प्रो. सरस्वती एवं श्रीवास, डॉ. सुनील कुमार, 2022, योग के आधार भूततत्व एवं सिद्धान्त, किताब महल, नई दिल्ली
बिजलानी, आर, (2008), स्वस्थ जीवन शैली के लिए योग, सार, राष्ट्रीय योग सप्ताह -2008, मोरार जी देसाई, नई दिल्ली
नागेंद्र, एच. आर., (1993), आधुनिक जीवन की समस्याओं के लिए समग्र दृष्टिकोण, योग सागर में, विश्व योग सम्मेलन की कार्यवाही (पृष्ठ 251-259), मुंगेर, बिहार स्कूल ऑफ योग
श्रीवास्तव,रामजी, 2006,मनोवैज्ञानिक प्रयोग एवं परीक्षण, दिल्ली, प्रकाषक मोती लाल बनारसी दास पृ.617-618
पाण्ड्या, प्रणव, वर्ष जनवरी 2003, इस युग की महान व्याधिः मानसिक तनाव, अखण्ड ज्योति, हरिद्वार
हर्षानंद, स्वामी, (1996), रामकृष्ण की आधुनिक जीवन की प्रासंगिकता, बंगलोर रामकृष्ण मठ, 5600149
Downloads
Published
How to Cite
Issue
Section
License

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License.