वर्तमान युग में सोशल मीडिया के सामाजिक दुष्प्रभावों का विश्लेषण
Keywords:
मनोविकार, आभाषी, एब्यूज, अपसंस्कृति, समरसताAbstract
वर्तमान आधुनिक युग में सम्पूर्ण विश्व की आधी से अधिक आबादी सोशल मीडिया का प्रयोग कर रही है। लंदन
की रिसर्च फर्म ग्लोबल वेब इंडेक्स ने कोरोना लॉकडाउन के समय दुनिया के 18 देशों में सर्वे किया था जिसके
अनुसार लॉकडाउन की अवधि में लोग सोशल मीडिया पर अधिक समय बिता रहे हैं। डेटा रिपोर्टल की रिपोर्ट के
अनुसार भारत की 137 करोड आबादी में से 102 करोड़ लोगों के पास मोबाईल फोन है कनेक्शन है तथा इंटरनेट
यूजर्स की बात की जाए तो देश की 50ः आबादी तक इंटरनेट की पहुंच है। स्पष्ट है कि भारत सहित विश्व के सभी
देशों में सोशल मीडिया का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया का क्रेज किशोरों में ही नहीं बल्कि पुरानी
पीढ़ी सहित सभी में लोकप्रिय है। जहां ये मित्रों तथा परिवारजनों के मध्य संबंध को स्थापित करने का अवसर प्रदान
करता है वहीं व्यापार के लिए भी सोशल मीडिया का प्रयोग लाभप्रद साबित हो रहा है। सोशल मीडिया के प्रयोग
द्वारा संभावित ग्राहकों को संगठित कर व्यापार में वृद्धि की जा सकती है। जहां एक तरफ सोशल मीडिया के प्रयोग
के कई सकारात्मक पहलू है वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया का अनियंत्रित और अत्यधिक प्रयोग गंभीर परिणाम
भी उत्पन्न कर सकता है। सोशल मीडिया का अधिक प्रयोग मस्तिष्क को थकान एवं तनाव की ओर ले जाता है
तथा एकाग्रता को भंग करता है। सोशल मीडिया में पहचान की चोरी, हैकिंग, साइबर धोखाधड़ी की संभावना
अधिक रहती है। इसलिए सोशल मीडिया का उपयोग बहुत सावधानी के साथ करना चाहिए। सोशल मीडिया के
प्रयोग के बढ़ते प्रचलन के कारण बहुत सी चीजों में बड़े बदलाव किए हैं। पुस्तकों का स्थान स्मार्ट फोन ने ले लिया
है। बच्चों तथा युवाओं में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रयोग के कारण लोग आमने-सामने की वास्तविक स्थिति में कम
मिल रहे हैं जिसके कारण व्यक्ति अकेलापन, अवसाद, हाईपरटेंशन जैसी समस्याओं से भी जूझ रहा है। सोशल
मीडिया व्यक्तियों में बढ़ती हताशा तथा निराशा का भी एक प्रमुख कारण है। इन सभी तथ्यों के साथ हमें यह ध्यान
रखना है कि सोशल मीडिया एक तकनीक है जिसका प्रयोग हमें कब, कितना और किस कार्य के लिए करना है, यह
हमारी सोच पर निर्भर है। यदि हम इस तकनीक का समझदारी के साथ ज्ञान प्राप्त करने तथा सकारात्मक तथ्यों
को प्राप्त करने के लिए प्रयोग करेंगे तो यह हमारे लिए लाभप्रद होगी।
References
उमेश कुमार राय, सोशल मीडिया का बढ़ता दायरा, वरदान भी अभिषाप भी
- www.jagran.com.uttarpradesh
दीपक राय, सोशल मीडिया के उपयोग के बाद युवाओं की पुस्तकों से बढ़ती दूरी का अध्ययन
निधि सिंह, hindisahitya.in
गीता यादव, औरतों के लिए खतरनाक और जहरीली जगह है सोशल मीडिया
- hindi.mapsofindia.com>society>a
- Prabhanjan saho, hindime.net.internet
- newsmeto.com
डॉ. एम. रहमतुल्लाह, समाज को प्रभावित करता सोशल मीडिया
मानसी दास, बी.बी.सी. संवाददाता, www.bbc.com
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