पर्यावरणीय विमर्श में गांधी वादी चिंतन की प्रासंगिकता

Authors

  • मुनेश कुमार पाठक असि0 प्रो0, राजनीति विज्ञान विभाग, राजकीय महाविद्यालय, गणाई गंगोली (पिथौरागढ़)

Keywords:

पर्यावरण, गांधी चिंतन

Abstract

हमारा उद्देश्य जीने लायक जगह तथा जीने योग्य जीवन हमारे जीवन शैली के बदलाव के माध्यम से प्राप्त
किए जा सकते हैं। हमारी असीमित जरूरत और असीमित लालच को नियंत्रित किया जाना चाहिए। आर्थिक हमारे
दृष्टिकोण-विकास और आर्थिक उन्नति पर मानव मूल्यों के साथ सामंजस्यपूर्ण होना चाहिए। गांधी जी का समूचा
जीवन और कार्य पर्यावरणीय संरक्षण का उदाहरण है। ऐसा इसीलिए नहीं है कि उन्होंने पर्यावरण पर अपने विचारों
को कलमबंद किया, बांध का कार्य रोकने के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया या नदी की सफाई की बल्कि सही
मायने में वे सतत् विकास के प्रणेता थे। संक्षेप में, हम कह सकते है कि उनका पूरा जीवन एक संदेश था। उनका
जीवन भारतीयों के विकास का मार्गदर्शक था और शेश दुनिया के लिए अनुयायी पथ।

 

Author Biography

मुनेश कुमार पाठक, असि0 प्रो0, राजनीति विज्ञान विभाग, राजकीय महाविद्यालय, गणाई गंगोली (पिथौरागढ़)

राजकीय महाविद्यालय, गणाई गंगोली (पिथौरागढ़)

References

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Published

28-03-2021

How to Cite

मुनेश कुमार पाठक. (2021). पर्यावरणीय विमर्श में गांधी वादी चिंतन की प्रासंगिकता. RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES, 8(1), 49–51. Retrieved from https://ijorr.in/ojs/index.php/rrssh/article/view/36