आचार्य डाॅ0 राम किशोर मिश्र के संस्कृत ग्रन्थों मंे राष्ट्रीय चेतना

Authors

  • मनोज कुमार जोशी सहायक प्राध्यापक संस्कृत गुरूनानक देव स्नातकोत्तर महाविद्यालय नानकमत्ता साहिब, ऊधम सिंह नगर (उत्तराखण्ड)

Keywords:

आचार्य डाॅ0 राम किशोर मिश्र के संस्कृत ग्रन्थ, राष्ट्रीय चेतना

Abstract

आज भारत में कुछ लोग भारत देश से अलग होने की बात करते हैं उसके लिए वे लोग अनेक प्रकार के आन्दोलनों के माध्यम से हिंसक प्रकारों का अवलंबन करके जनमानस व सरकार को बाध्य करते हैं। इस अलगाववाद की भावना को दूर करने के लिए अपने देशवासियों में राष्ट्रीय एकता, राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना देश प्रेम स्वाभिमान आत्मबलिदान की भावना आदि जागृत करने के लिये गंभीरता से विश्लेषण करना है। किसी भी ग्रन्थ की श्री वृद्धि में किसी कवि का क्या योगदान रहा है? इसका ज्ञान उसके कृतियों का अवलोकन करके ही पता चलता है कि उसके ग्रन्थों में इसकी भावनाएं किस-किस के प्रति हैं। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य भी कवि का राष्ट्र भावनाओं का अध्ययन करना है।

References

शतपथ ब्राह्मण- 6-73.7

नई कविता में राष्ट्रीय चेतना पृ0 24 डां देवराज शर्मा

डाॅ0 विष्णुदत्त राकेश - पन्त जी का नवीन बोधकाव्य

सिद्धान्त कौमुदी

हिन्दी कविता में युगान्तर डाॅ0 सुधीर पृ0 164,165

वही

राष्ट्र की उत्पत्ति और भारतीय राष्ट्रीयता

काव्यकिरणावलिः

काव्यकिरणावलिः

नारीकथाऽमृतम् पृ0-12

किशोरकथावली पृ0-81

काव्यकिरणावलिंः (सप्तम किरण) गीत संख्या (6)

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नई कविता में राष्ट्रीय चेतना पृ0 24 डां देवराज शर्मा

वही

राजनीति शास्त्र के सिद्धान्त पृ0 83,84 - रामचन्द्र अग्रवाल

हिन्दी कविता में युगान्तर डाॅ0 सुधीर पृ0 164,165

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Published

15-04-2022

How to Cite

मनोज कुमार जोशी. (2022). आचार्य डाॅ0 राम किशोर मिश्र के संस्कृत ग्रन्थों मंे राष्ट्रीय चेतना. RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES, 9(1), 54–57. Retrieved from https://ijorr.in/ojs/index.php/rrssh/article/view/12