संगीत-शिक्षा में तबला एवं बाज का संक्षिप्त परिचय: एक अध्ययन
Keywords:
तबला, बन्द बाज, खुलाबाज एवं पश्चिम बाजAbstract
जब कोई कला विध विकसित एवं परिष्कृत होकर सुसंस्कृत और समृद्ध होकर कला मर्मज्ञ जनसमाज में विशेष मान्यता व प्रतिष्ठा होती है तब उसकी एक परम्परा चल पड़ती है। संगीत शिक्षा के घरानों के नियम भी होते है। विद्वानों ने अपने-अपने घराने की वादन शैलियों में भिन्न-भिन्न बोलों को निकालने एवं निकास की अलग-अलग विधि को अपनाया है। कला विधाओं की इस परम्परा में जहाँ कलाकारों का इतिहास और उनकी कलात्मक उपलब्धियों का समावेश रहता है वहीं पीढ़ी दर पीढ़ी कला की प्रायोगिक उन्नति के आधार पर भिन्न-भिन्न शैलियों की सृष्टि और उनकी प्रगति भी समाविष्ट रहती है। इस दृष्टि से भारतीय संगीत शिक्षा मंे गायन, वादन तथा नृत्य विधाओं की परम्पराएँ अलग-अलग समय पर विविध रूपों में प्रस्पुफटित होती रही है और कालान्तर में यही परम्पराएँ संगीत के विभिन्न घरानों के रूप में विकसित हुई।
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