संगीत-शिक्षा में तबला एवं बाज का संक्षिप्त परिचय: एक अध्ययन

Authors

  • अनुजा रोहिला असिस्टेंट प्रोफेसर संगीत, श्रीगुरु राम राय विश्वविद्यालय, देहरादून, उत्तराखण्ड

Keywords:

तबला, बन्द बाज, खुलाबाज एवं पश्चिम बाज

Abstract

जब कोई कला विध विकसित एवं परिष्कृत होकर सुसंस्कृत और समृद्ध होकर कला मर्मज्ञ जनसमाज में विशेष मान्यता व प्रतिष्ठा होती है तब उसकी एक परम्परा चल पड़ती है। संगीत शिक्षा के घरानों के नियम भी होते है। विद्वानों ने अपने-अपने घराने की वादन शैलियों में भिन्न-भिन्न बोलों को निकालने एवं निकास की अलग-अलग विधि को अपनाया है। कला विधाओं की इस परम्परा में जहाँ कलाकारों का इतिहास और उनकी कलात्मक उपलब्धियों का समावेश रहता है वहीं पीढ़ी दर पीढ़ी कला की प्रायोगिक उन्नति के आधार पर भिन्न-भिन्न शैलियों की सृष्टि और उनकी प्रगति भी समाविष्ट रहती है। इस दृष्टि से भारतीय संगीत शिक्षा मंे गायन, वादन तथा नृत्य विधाओं की परम्पराएँ अलग-अलग समय पर विविध रूपों में प्रस्पुफटित होती रही है और कालान्तर में यही परम्पराएँ संगीत के विभिन्न घरानों के रूप में विकसित हुई।

References

डाॅ. आबान ए. मिस्त्री, पखावज और तबला के घराने एवं परम्पराएँ, प्रकाशक-पं. केकी. एस. जिजिना स्वर साधना समीति, बम्बई

डाॅ. कुमार ऋषितोष, 2015, तबले का उद्गम एवं दिल्ली घराना, कनिष्क पब्लिशर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स, नई दिल्ली, प्रथम संस्करण

पं. छोटेलाल मिश्र, 2006, ताल प्रबंध , कनिष्क पब्लिशर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स, नई दिल्ली, प्रथम संस्करण

डाॅ. सुदर्शन राग, 2008, तबले के घराने वादन शैलियाँ एवं बंदिशें, कनिष्क पब्लिशर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स, नई दिल्ली, प्रथम संस्करण

डाॅ. लालमणि मिश्र, 2011, भारतीय संगीत वाद्य, भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली, चैथा संस्करण

राजीव त्रिवेदी, भारतीय शास्त्रीय संगीत शास्त्र, शिक्षण व प्रयोग, प्रकाशक, साहित्य संगम, नया 100 लूकर गंज, इलाहाबाद

Downloads

Published

15-04-2022

How to Cite

अनुजा रोहिला. (2022). संगीत-शिक्षा में तबला एवं बाज का संक्षिप्त परिचय: एक अध्ययन. RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES, 9(1), 51–53. Retrieved from https://ijorr.in/ojs/index.php/rrssh/article/view/11