आधुनिक समय में योग के प्रमुख अंग ध्यान व प्राणायाम की उपयोगिता

Authors

  • भरत लाल बारी योग प्रशिक्षक, योग वैलनेस सेंटर, राजकीय आयुर्वेदीक चिकित्सालय, खप्टिहा कलां, बाँदा

Keywords:

योग, प्राणायाम, ध्यान, व्यक्ति, शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य

Abstract

प्राणायाम एवं ध्यान के माध्यम से जीवन की इस व्यापक दृष्टि को प्राप्त करने की अभिलाषा होती है जो कि एक उपलब्धि है। हमें अपना और जगत् का व्यापक दर्शन होते है। उस दृष्टि के प्राप्त होते ही हमें परम सत्य का ज्ञान होता है। हमे उस दिव्य शक्ति से एकाकार एवं विशिष्ट अनुभूति होती है। उपनिषद् में प्राणायाम व साकार ध्यान ज्ञान और अनुभव के एक विशेष स्तर पर ले जाता है; जबकि निराकार ध्यान अन्य स्तर पर ले जाना है। अतः चेतना के विकास के लिए दोनों प्रकार का ध्यान आवश्यक है। प्रस्तुत विषय में योग के मुख्य अंग प्राणायाम एवं ध्यान के सरल एवं सहज रुप से जीवन में व्याप्त अन्तरम् परतो में छिपी गहन जिज्ञासाओं का समाधान प्रस्तुत करना है क्योकि आज संसारिक वैभव, प्रसिद्धि एवं प्रतिष्ठा व्यक्ति को जीवन की सत्यता से दूर कर रहा है। मन सत्य को जानने से इन्कार कर रहा है। परिणामतः व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक रूप से अस्वस्थ्य हो रहा है, वह भोजन एवं औषधि पर ऊर्जा के लिए निर्भर होता जा रहा है। यही कार्य योग शक्ति कर सकती है जिसका प्रभाव अतिसूक्ष्म एवं कई गुना अधिक है। योग शक्ति का प्रवाह सर्वज्ञ विद्यमान है जो सृष्टि का मुख्य आधार है। योग से ही तत्त्वबोध की प्राप्ति एवं आत्मसाक्षात्कार संभव होता है।

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Published

15-04-2022

How to Cite

भरत लाल बारी. (2022). आधुनिक समय में योग के प्रमुख अंग ध्यान व प्राणायाम की उपयोगिता. RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES, 9(1), 47–50. Retrieved from https://ijorr.in/ojs/index.php/rrssh/article/view/10