RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES http://ijorr.in/index.php/rrssh <h4>International Refereed, Blind Peer Reviewed, Open Access, Multidisciplinary Research Journals</h4> <p>Periodicity: Quaterly</p> <p>Language: English &amp; Hindi</p> <p>ISSN : 2348-3318 (Print)</p> Ritesh Kumar en-US RECENT RESEARCHES IN SOCIAL SCIENCES & HUMANITIES 2348-3318 Microfinance an Opportunity through SHG’s Economic Status - An Impact study http://ijorr.in/index.php/rrssh/article/view/17 <p>Microfinance can be termed as small scale provision of financial services like credit, savings,<br />insurance, money transfer and counselling to people who are unable to obtain these services from the<br />formal financial institutions. There is one of the major tool used for microfinance is Shelf help groups<br />(SHG’s). SHG is the small autonomous groups of people living in the vicinity who voluntary associate<br />themselves for common concern, mainly to eradicate poverty. It is a group of approximate 10-20<br />members who need not necessarily be registered. All the members agree for common savings,<br />generate a common fund and utilises the same for their credit need through a management. This<br />study is mainly an impact in which I had find out the impact on income level of beneficiaries by this<br />scheme of SHG. The data has been collected through primary sources for analysis purpose and<br />secondary data also used for its introduction and for the review of literature related to this paper. The<br />data of income related factors has been divided between before and after the scheme of SHG’s and<br />this data is analysed by using Paired-T test. The result found through analyses showing positive<br />impact on the income of members of SHG’s.</p> <p>DOI : 10.5281/zenodo.8151569,</p> <p>Similarity/Plagiarism: 10%</p> Roshni Rawat Copyright (c) 2023 https://creativecommons.org/licenses/by-nc-nd/4.0 2023-09-10 2023-09-10 10 2 1 7 मधुमेह टाईप-2 के रोगियों की फासिटंग ब्लड शुगर पर यौगिक मुद्राओ एवं होम्योपैथी मदर टिंचर के प्रभाव का अध्ययन http://ijorr.in/index.php/rrssh/article/view/20 <p>प्रस्तुत शोध प्रबंध वर्तमान भौतिकवादी परिदृश्य में भयाभय मधुमेह टाईप-2 की समस्याओं का विश्लेषण यदि सूक्षमता से<br>किया जाए तो यह देखा जा रहा है कि वर्तमान में बढ़ते हुए तनाव, अतिमहत्वाकांक्षा, अनियंत्रित जीवनशैली, खानपान की<br>गलत आदते, व्यायाम की कमी आदि के कारण होंने वाली चयापचय संबंधी विकृति के कारण सबसे अधिक मधुमेह रोगी<br>आज हमारे देश में पाये जाते है। आज पूरे विश्व का चिकित्सा जगत मधुमेह रोगियों के तेजी से बढ़ते हुए बिस्फोटक<br>आंकडो को देखकर चिंतित है। विश्व जनसंख्या की लगभग 25 प्रतिशत आवादी मेटाबालिक सिंड्रोम से पीड़ित है तथा<br>विश्व में मधुमेह मृत्यु का एक मुख्य कारण है।<br>डब्ल्यू.एच.ओ. के अनुसार विश्व में लगभग 442 करोड़ मधुमेह रोगी है। डब्ल्यू.एच.ओ. ग्लोबल रिर्पोट ऑफ डायबिटीज<br>2016 के अनुसार यह संख्या वर्ष 2030 में दोगुनी हो जायेगी। सन् 2000 में भारत में मधुमेह से पीड़ित लोगो की संख्या<br>भारत में 3 करोड़ 17 लाख थी जो वर्ष 2030 में लगभग 8 करोड़ (80 मिलियन) से अधिक हो जायेगी ओर भारत विश्व<br>में मधुमेह की राजधानी बन जायेगा जो बहुत ही चिंता का विषय प्रतिवर्ष मधुमेह के कारण हजारो लोगो की असमय ही<br>मौत हो जाती है प्रस्तुत शोध पत्र में मधुमेह के प्रबंधन हेतु योगिक मुद्राओं ओर होम्योपैथी मदर टिंचर्स के प्रभाव के<br>तुलनात्मक अध्ययन को सुझाया गया है जिससे मधुमेह जैसे रोगो से छुटकारा प्राप्त कर स्वस्थ जीवन लाभ प्राप्त हो<br>सकें।</p> <p>DOI : 10.5281/zenodo.8151582</p> <p>Similarity/Plagiarism: 7%</p> अशोक पचोरी ओम नारायण तिवारी Copyright (c) 2023 https://creativecommons.org/licenses/by-nc-nd/4.0 2023-09-10 2023-09-10 10 2 17 22 Impact of Artificial Intelligence on Education and Learning Outcome http://ijorr.in/index.php/rrssh/article/view/18 <p>Artificial Intelligence is taking gradually but steadily over almost everything. The results and impact<br />are now tremendous as people are excited. The consequences are considered on the basis of quick and<br />readiness bereft its quality and justification. Science, Law, Medicine almost all subjects are being<br />covered by AI. People are quickly learning to use them, as well as being indolent. Education as a<br />whole is the biggest range of subjects that is now under the purview of AI. ChatGpt Open AI is now<br />used rampantly by everybody from students, teachers to content creators. Modernization in<br />education is always good for the posterity. It makes the learning outcome cognizable among the<br />learners. To quote the Grail Knight from the movie Indiana Jones and the Last Crusade, the he said,<br />“You must choose, but choose wisely as the true grain will bring you life, false grail will take from<br />you.” Artificial Intelligence may that grail and we must choose wisely for the benefit of the entire<br />learner community and generations to come, as the true approach and method will bring life to<br />education, wrong will take it from it.</p> <p>DOI : 10.5281/zenodo.8151576,</p> <p>Similarity/Plagiarism: 9%</p> <p> </p> Kamal Bhattacharyya Copyright (c) 2023 https://creativecommons.org/licenses/by-nc-nd/4.0 2023-09-10 2023-09-10 10 2 8 11 Language, Technology and Empowerment http://ijorr.in/index.php/rrssh/article/view/19 <p>The heritage texts of Sanskrit and Indian languages contain knowledge helpful for wellbeing of<br />humanity. The onus is on scholars of these traditions to put forth the huge ambit of this knowledge in<br />a succinct and articulate manner to the masses. Knowledge is for one and all. The shrunk coverage<br />attached with the texts particularly the access to the university classroom as well as good teachers is a<br />hindrance in the path of inclusivity and nation building. This paper delves upon our vast intellectual<br />heritage and the means to inculcate its noesis in the acumen of the young and not so young alike. While<br />highlighting the best practices we shall also propound effective models to disseminate this knowledge<br />for linguistic and technological empowerment of learners.</p> <p>DOI : 10.5281/zenodo.8151578,</p> <p>Similarity/Plagiarism: 10%</p> Anamika Shukla Chitresh Soni Copyright (c) 2023 https://creativecommons.org/licenses/by-nc-nd/4.0 2023-09-10 2023-09-10 10 2 12 16 मानव अधिकार संरक्षण के लिए भारत में मानव अधिकार संस्थाएं http://ijorr.in/index.php/rrssh/article/view/21 <p>मानव अधिकार एक सभ्य और सुसंस्कृत समाज का अपरिहार्य शर्त है जो आज के मानव समाज के अस्तित्व की आधारशिला<br>है। वैदिक काल (1500-500 ई.पू.) में मानवाधिकार के संरक्षण और संवर्द्धन की झलक देखने को मिलती है। ऋगवेद की<br>ऋचा ’सर्वे भवन्तु सुखिनः’ इसी बात का प्रतिपादन करती है। वर्ष 1993 में मानव अधिकार विश्व सम्मेलन (वियना) ने ऐसी<br>संस्था या आयोग के महत्व को समझते हुए अनेक राष्ट्रों ने अपने यहां मानवाधिकार आयोग का गठन किया। सरकारें<br>(लोकतांत्रिक सरकारें भी) मानवाधिकार का सरेआम उल्लंघन करती हैं। इस बात के होते हुए भी कि देश में, विधायिका,<br>कार्यपालिका, न्यायपालिका, जन-संचार माध्यम, प्रेस आदि हैं। मानव अधिकार राजनीतिक शक्ति की प्रतिलिपि है और यह<br>राज्य को शासित करने वालो में निहित है। राज्य शक्ति तथा जनशक्ति दोनों का जन्म मानवाधिकारों से होता है। जन<br>शक्ति में वृद्धि के लिए राज्य शक्ति के स्थान पर अधिक शक्तिशाली लोकशक्ति की आवश्यकता है और यह केवल तभी<br>संभव है जब लोगों में मानवाधिकारों का प्रचार-प्रसार किया जाए और उनके कार्यन्वयन के लिए बाध्य किया जाए।<br>वास्तविक तब संभव होता है जब राज्यशक्ति पर लोकशक्ति का नियंत्रण होता है।</p> <p>DOI : 10.5281/zenodo.8151590,&nbsp;</p> <p>Similarity/Plagiarism: 10%</p> संतोष कुमार सिंह Copyright (c) 2023 https://creativecommons.org/licenses/by-nc-nd/4.0 2023-09-10 2023-09-10 10 2 23 31 संयुक्त राष्ट्र संगठन विकास एवं उदय http://ijorr.in/index.php/rrssh/article/view/22 <p>संयुक्त राष्ट्र संघ एक अंतराष्ट्रीय संगठन है, प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध के उपरांत बनाए गए इस संगठन का उद्देश्य विश्व<br>शांति बनाए रखना था। इसके अतिरिक्ति यह संगठन जन-कल्याण, ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा व आतंकवाद<br>जैसे बङे मुद्दों पर भी कार्य करता है। इस संघ का अपना चार्टर है, जिसके अनुसार यह कार्य करता है एंव इसके 6 अंग<br>है। संयुक्त राष्ट्र संघ एक सफल अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी कहलाता है। इसमें शामिल होने वाले देशों की संख्या 193 है, व<br>2011 अंतिम देश जो इसमे शामिल हुआ में दक्षिण सुडान था।</p> <p>DOI : 10.5281/zenodo.8151592 Similarity/Plagiarism: 6%</p> कनिका फोजिया प्रवीन Copyright (c) 2023 https://creativecommons.org/licenses/by-nc-nd/4.0 2023-09-10 2023-09-10 10 2 32 38 श्रीमद्भगवद्गीता में प्रबंधन का प्रमुख स्रोतः एक विवेचनात्मक अध्ययन http://ijorr.in/index.php/rrssh/article/view/23 <p>श्रीमद्भगवद्गीता ’वेदों, पुराणों तथा उपनिषदों जैसे आवश्यक प्राचीन भारतीय ग्रंथों में से एक है, जिसे प्राथमिक दिव्य<br>रहस्योद्घाटनों में से एक माना जाता है। श्रीमद्भगवद्गीता विभिन्न आध्यात्मिक मार्ग दिखाकर हमारा मार्गदर्शन करती है,<br>जिसके माध्यम से हम आत्म-ज्ञान के साथ-साथ आंतरिक शांति भी प्राप्त कर सकते हैं। पवित्र शास्त्र के रूप में<br>श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाएँ एक तरफ आज के प्रबंधकों को उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने के लिए तैयार करती हैं और<br>दूसरी ओर आज की कारोबारी दुनिया में मानवीय स्पर्श के महत्व पर बल देती है। भगवद्गीता में मन का प्रबंधन, कर्तव्य<br>का प्रबंधन तथा आत्म प्रबंधन इन तीनों सिद्धांतों पर बल दिया है। इसमें प्रतिपादित सिद्धांत, सार्वभौमिक अनुप्रयोग प्रतीत<br>होते हैं तथा प्रबंधकों के लिए अपने चरित्र को ढा़ लने और अपनी प्रबंधकीय प्रभावशीलता को विकसित करने के लिए खुद<br>को मजबूत करने के लिए उपयोगी हैं। अपने आसपास की दुनिया के बारे में मनुष्य की समझ स्वयं की समझ के समानुपाती<br>होती है। इस शोध पत्र का उद्देश्य श्रीमद्भगवद्गीता में दिव्य सिद्धांतों की खोज करना है ताकि मानव पूंजी के मस्तिष्कीय<br>प्रबंधन और विकास के लिए इसे लागू किया जा सके। यह शोध पत्र श्रीमद्भगवद्गीता के सिद्धांतों की बुनियादी समझ<br>और दैनिक जीवन में इसके अनुप्रयोग को प्रबंधन तथा तनाव से निपटने के लिए एक प्रभावी उपकरण के रूप में प्रस्तुत<br>करता है। यह अध्ययन दर्शाता है कि कैसे ’श्रीमद्भगवद्गीता’ आधुनिक मानव समाज के जीवन को प्रभावित करती है।</p> <p>DOI : 10.5281/zenodo.8151596,</p> <p>Similarity / Plagiarism: 4%</p> दृष्टि राज महावीर अग्रवाल Copyright (c) 2023 https://creativecommons.org/licenses/by-nc-nd/4.0 2023-09-10 2023-09-10 10 2 39 42 Effect of Yoga, Asanas & Pranayama on Quality of Sleep and Concentration http://ijorr.in/index.php/rrssh/article/view/24 <p>Yoga originated in India thousands of years ago and at present Yoga, Asana and Pranayama which<br>have proved to be an effective method for prevention and management of diseases and improvement<br>of health are being adopted by the people. Yoga (Asana, Pranayama) is the ancient practice has become<br>increasingly popular in today's busy lives. In today's era where modern man is facing health related<br>physical and mental problems at an abnormal rate, Yoga (Asana Pranayama) plays an important role<br>in its solution. The best way to fit ourself. Yoga involves physical poses, and deep breathing. Asanas,<br>Pranayama is a mind and body practice. One can achieve complete control of mind over body by being<br>both physically and mentally fit. Yoga (Asanas, Pranayama have been practiced in India since ancient<br>times and provides a healthy mind and a sound body. The purpose of this study is to examine the<br>benefits of Asanas, Pranayama on Sleep &amp; Concentration.</p> <p>DOI : 10.5281/zenodo.8151600,</p> <p>Similarity / Plagiarism: 9%</p> Priti Devi Arti Yadav Copyright (c) 2023 https://creativecommons.org/licenses/by-nc-nd/4.0 2023-09-10 2023-09-10 10 2 43 48 Role of Medical Social Worker Related to Disorder in Old Age with Special Reference to Epilepsy in District Dehradun http://ijorr.in/index.php/rrssh/article/view/25 <p>The mortality rate for elderly adults with epilepsy is two to three times that of the general population.<br>Nearly 80% of incidents take place in underdeveloped nations. It caused 125,000 deaths in 2015, up<br>from 112,000 deaths in 1990. Older persons are more likely to have epilepsy. Due to variations in the<br>frequency of the underlying causes, onset is more frequent among older children and young adults in<br>the developing world. Although epilepsy is a common neurological condition with documented<br>cognitive effects, we will argue in the review that little is known about how chronic epilepsy affects<br>cognition and brain structure in older (age 50+) and older (age 65+) individuals</p> <p>DOI : 10.5281/zenodo.8151604,</p> <p>Similarity / Plagiarism: 12%</p> Anuradha Verma Copyright (c) 2023 https://creativecommons.org/licenses/by-nc-nd/4.0 2023-09-10 2023-09-10 10 2 49 51 सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस और योग चिकित्सा http://ijorr.in/index.php/rrssh/article/view/26 <p>सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटस की समस्या स्पाइन के सबसे उपरी भाग सर्वाइकल स्पाइन में होती है। यह समस्या गर्दन के<br>आसपास के मेरुदंड की हड्डिडयों की असामान्य बढ़ोतरी और सर्वाइकल वेटेब्रा के बीच के कुशनों इंटरवटेबल डिस्क में<br>कैल्शियम का डी-जेनरेशन, बहिःक्षेपण तथा सर्वाइकल क्षेत्र में फुलाव अथवा सूजन और अपने स्थान से सरकने की वजह<br>से होता है। वेटेब्रा के बीच के कुशनों के डी-जेनरेशन से नसों पर दबाव पड़ता है और इससे सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटस<br>के लक्षण दिखते हैं। यह समस्या स्पाइन के सबसे उपरी भाग सर्वाइकल स्पाइन में होती है। सामान्यतः 4वीं, 5वीं, 5वीं-6टी,<br>6टी-7वीं के बीच डिस्क का सर्वाइकल वेटेब्रा अधिक प्रभावित होता है। आज योग चिकित्सा में अनेकानेक शोध किये जा<br>रहे है। जिस कारण आज योग चिकित्सा का महत्व बढ़ता ही जा रहा है। जितना योग का अध्यात्म में महत्व है उतना ही<br>योग शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।</p> <p>DOI : 10.5281/zenodo.8151614,</p> <p>Similarity / Plagiarism: 9%</p> ललित मोहन अखिलेश कुमार सिंह Copyright (c) 2023 https://creativecommons.org/licenses/by-nc-nd/4.0 2023-09-10 2023-09-10 10 2 52 54